म्यूचुअल फंड के बारे में मिथक व सच्चाई : Mutual Fund Myths in Hindi [BUSTED]

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Mutual Fund Myths in Hindi

Hi friends! यह है कुछ प्रचलित Mutual Fund Myths in Hindi के बारे में एक डिटेल लेख। जब भी निवेश की बात होती है तो शेयर बाज़ार के ख़तरों को देखते हुए उसके अलावे बेहतर निवेश विकल्प की तलाश होती है।

ऐसे में mutual funds में निवेश की बात सामने आती है। और तब इससे जुड़े कुछ मिथक भी दिमाग़ में घूमने लगते हैं जो निवेश प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करते हैं।

तो आज मैं आपको Mutual Fund Myths Busted & Reality के बारे में ही बताने जा रहा हूँ ताकि आपके मन में बैठे ग़लत सोच को दूर किया जा सके। अगर आप भी म्यूचुअल फंड से जुड़े मिथक और सच्चाई जानना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल अंत तक ज़रूर पढ़ें।

Mutual Fund Myths in Hindi #1

म्यूचूअल फ़ंड में हमेशा बड़ा निवेश करना होता है।

सच्चाई: म्यूचूअल फ़ंड में निवेश करने के लिए बड़ी राशि की ज़रूरत नहीं होती है। इसमें न्यूनतम 500 रुपए से भी निवेश शुरू किया जा सकता है।

Systematic Investment Plan (SIP) के माध्यम से हर महीने एक छोटी रक़म से निवेश किया जा सकता है। वास्तव में जितना जल्द आप निवेश शुरू करेंगे, लम्बी अवधि में उतना ही बेहतर रिटर्न मिलता है क्योंकि उसमें compounding का लाभ मिलता है।

म्यूचुअल फंड मिथक #2

Diversification के लाभ के लिए बहुत सारे म्यूचूअल फ़ंड में निवेश करना होगा।

सच्चाई: Mutual fund में विभिन्न तरह के asset class में निवेश करता है जैसे Equity, Debt & Hybrid Funds.

निवेशक अपनी जोखिम क्षमता और निवेश लक्ष्य के अनुरूप एसेट क्लास चुन सकता है और हर एसेट क्लास जैसे equity के अंदर भी categorization बना हुआ है जैसे कि equity में इंडेक्स फ़ंड, large cap fund, mid cap, small cap आदि। डेब्ट फ़ंड में मनी मार्केट, शॉर्ट टर्म डेब्ट और लोंग टर्म डेब्ट।

Mutual Fund Myths in Hindi

हर निवेशक अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार इनमें से किसी भी AMC के फ़ंड में निवेश करता है। और अपने निवेश को diversify कर सकता है। यह ज़रूरी नहीं है कि ज़्यादा फ़ंड में निवेश करने से ज़्यादा रिटर्न आएँगे।

Mutual Fund Myth & Reality #3

पुराना रिटर्न देख कर म्यूचूअल फ़ंड में निवेश करना ही बेहतर रिटर्न की गारंटी होती है।

सच्चाई: पिछला रिटर्न देखकर म्यूचूअल फ़ंड में निवेश नहीं करना चाहिए। पूर्व में काम समय में बेहतर प्रदर्शन करनेवाले फ़ंड भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे, यह सुनिश्चित नहीं होता।

फ़ंड मैनेजर के पर्फ़ॉर्मन्स को ट्रैक करें वह ज़्यादा बेहतर होता है। और पिछले एक या दो साल के रिटर्न को देखने के बजाय पिछले दस साल के रिटर्न को देखते हुए फ़ंड में निवेश करना लाभकारी होता है।

Mutual fund में किए गए निवेश को समय-समय पर रिव्यू करना चाहिए कि वह आपकी ज़रूरतों के अनुसार प्रदर्शन कर रहा है या नहीं।



Mutual Fund Myths in Hindi #4

म्यूचूअल फ़ंड में निवेश शुरू करने के demat account की ज़रूरत होती है।

सच्चाई: बिना डीमैट अकाउंट के भी म्यूचूअल फ़ंड में निवेश किया जा सकता है। म्यूचूअल फ़ंड के लिए डीमैट अकाउंट होना ज़रूरी नहीं है। वैसे आप डीमैट अकाउंट या बिना डीमैट अकाउंट के भी म्यूचूअल फ़ंड में निवेश कर सकते हैं।

निवेश करते समय केवल आपको एक आवेदन फ़ॉर्म भरना पड़ता है और अपना KYC पूरा करना होता है। अच्छा तरीक़ा है कि आप किसी अच्छे वित्तीय सलाहकार की मदद लें जो आपको फ़ंड के विषय में भी बताएगा, आपकी शंकाओं को दूर करते हुए निवेश की प्रक्रिया को पूरा करने में मदद करेगा।

म्यूचुअल फंड मिथक #5

नए निवेशकों के लिए म्यूचूअल फ़ंड सही विकल्प नहीं होता।

सच्चाई: यह बहुत बड़ा भ्रम है। म्यूचूअल फ़ंड नाए और छोटे निवेशकों के लिए एक बेहतर निवेश विकल्प होता है। इसमें फ़ंड मैनेज करने के लिए प्रफ़ेशनल फ़ंड मैनेजर होते हैं।

हाल के वर्षों में सेबी द्वारा उठाए गए क़दमों से म्यूचूअल फ़ंड में निवेशकों के लिए पारदर्शिता काफ़ी बढ़ गयी है। इसमें ठगे जाने की सम्भावना बिलकुल नहीं होती।

अगर आप पहली बार निवेश कर रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप इंडेक्स फ़ंड या लार्ज कैप फ़ंड में ही निवेश करें या SIP के माध्यम से भी निवेश कर सकते हैं।

Mutual Fund Myths in Hindi #6

म्यूचूअल फ़ंड में निवेश करने पर टैक्स में बचत नहीं की जा सकती है।

सच्चाई: म्यूचूअल फ़ंड में निवेश करने पर आयकर विभाग से 80C के तहत छूट प्राप्त होता है। उसके लिए म्यूचूअल फ़ंड के equity linked saving scheme (ELSS) में ही निवेश करना होता है।

इसका निवेश equity में होता है और equity का फ़ायदा इसमें मिलता है। Equity Linked Saving Scheme भी एक तरह का म्यूचूअल फ़ंड ही है।

इसमें तीन साल का lock-in period होता है। इसका फ़ायदा है कि यह एक टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट है जो टैक्स बचाने में आपकी मदद करता है।



म्यूचुअल फंड मिथक #7

सेक्टोरल फ़ंड या ज़्यादा जोखिम वाले फ़ंड ही बेहतर रिटर्न देते हैं।

सच्चाई: ऐसा बिलकुल नहीं है। फ़ंड्स के प्रदर्शन बहुत सारे कारकों पर निर्भर होता है। और यह एक economic scycle पर काम करता है। ऐसा ज़रूरी नहीं है कि हर तरह के फ़ंड एक साथ अच्छा रिटर्न दे।

लम्बी अवधि और अधिक जोखिम लेनेवाले निवेशकों के लिए small cap sector funds ठीक हो सकता है, पर नए निवेशकों, छोटे निवेशक और काम जोखिम लेने वाले निवेशकों को हमेशा diversified portfolio में ही निवेश करना चाहिए। सेक्टर फ़ंड में तभी निवेश करें जब आपको उस सेक्टर के विषय में पूरी जानकारी हो।

Conclusion: Mutual Fund Myths in Hindi (Busted)

तो फ़्रेंड्स, बस यही हैं कुछ प्रचलित Mutual Fund Myths & their Reality. मुझे आशा है कि आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा होगा और अब आपको यह भी अच्छे-से पता चल गया होगा कि म्यूचुअल फंड से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई क्या है?

Mutual Fund Myths in Hindi से सम्बंधित अगर आपके मन में किसी भी तरह का कोई सवाल हो, तो नीचे Comment कर ज़रूर बताएँ। अगर आप इसी तरह के और Investment Blogs in Hindi पढ़ना चाहते हैं, तो आप हमें follow कर सकते हैं।

अभी के लिए बस इतना ही, जल्द ही मिलेंगे किसी नए topic के साथ। Keep Reading… Keep Growing…


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