JivitPutrika/ Jitiya Vrat Katha in Hindi: जितिया पूजा विधि और कथा

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Jitiya Vrat Katha in Hindi

जितिया पूजा/जीवित्पुत्रिका व्रत कथा की पूरी जानकारी 

Hi friends! यह है Jitiya Vrat Katha in Hindi के बारे में एक विस्तृत लेख, जिसे हम JivitPutrika Vrat के नाम से भी जानते हैं. धार्मिक मान्यताओं में देखें, तो यह पर्व आश्विन महीने के कृष्णपक्ष की प्रदोषकाल व्यापिनी अष्टमी तिथि को संतान की आयु, आरोग्य तथा उनके कल्याण हेतु किया जाता है.

माताएं जीवित्पुत्रिका व्रत का पालन संतान के स्वस्थ, निरोग, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कमाना के लिए करती हैं. जिन महिलाओं को बच्चा नहीं है, वे संतान प्राप्ति की इच्छा से भी इस व्रत को करती हैं.

इसके सम्बन्ध में हमारे समाज में अवधारणा है कि Jitiya Parv केवल बेटों के लिए किया जाता है, जो बिलकुल भी सही नहीं है. JivitPutrika Vrat संतान के लिए किया जाता है, चाहे वो बेटा हो या बेटी.

तो आज मैं आपसे Jitiya Vrat Katha in Hindi के बारे में बात करने जा रहा हूँ कि JivitPutrika Vrat ka Itihas aur Pooja Vidhi क्या है? अगर आप भी इस पर्व के बारे में पूरी जानकारी जानना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल अंत तक जरुर पढ़ें.

Jitiya Vrat Katha in Hindi

प्रति वर्ष आश्विन महीने के कृष्णपक्ष की प्रदोषकाल व्यापिनी अष्टमी के दिन मनाये जानेवाले जीवित्पुत्रिका या जिउतिया व्रत के बारे में मान्यता है कि यह पर्व बेटों के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मनोकामना के लिए किया जाता है.

लेकिन आज के बदलते दौर में जहाँ हर तरह लैंगिक समानता की बातें हो रही हैं, वहां अब कई माताएं बेटियों के लिए भी व्रत रख रही हैं, जो सुखद है.

आज बेटियां हर कदम पर बढ़-चढ़ कर (कहीं-कहीं तो बेटों से आगे बढ़कर) समस्त पारिवारिक दायित्वों को निभा रही हैं, तो उनके लिए भी माताएं स्वस्थ, निरोग, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कमाना क्यूँ न करें?

आश्विन कृष्ण अष्टमी के दिन जो व्रती स्त्रियाँ अन्न भक्षण करती हैं, वे मृतवत्सा एवं दुर्भाग्य को पानेवाली होती हैं. मगर इसकी गलत व्याख्या से व्रतियों को बताया गया जल भी नहीं पीना है. इसका व्रतियों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

वर्षकृत्य में स्पष्ट उल्लेख है कि इस पर्व में केवल अन्न के निषेध को अनिवार्य बताया गया है. हालाँकि माताएं श्रद्धा व अपनी शक्तिनुसार व्रत के दौरान जल-अन्न का त्याग कर सकती हैं. यह पर्व संतान के चतुर्विद विकास के लिए किया जाता है.

JivitPutrika/Jitiya Vrat Kaise Kiya Jata Hai?

प्रतिवर्ष पितृ-पक्ष के दौरान परिवार में बच्चों के कल्याण के लिए अनुष्ठान कराया जाता है. माताएं अपने परिवार की महिला पूर्वजों और भगवान जीमूतवाहन को सरसों तेल एवं खल्ली से चढ़ा कर प्रार्थना हैं.

Jitiya Vrat Katha in Hindi

इस दिन माताओं द्वारा चूल्हों और सियारों (चिल व सियार) की कथा कही-सुनी जाती हैं. वे उन्हें चूडिया चढ़ाती हैं तथा दही खिलाती हैं. सूर्योदय होने के बाद उनका निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाता है.



Jitiya Puja Kyo Kiya Jata Hai?

धर्मशास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि जीवित्पुत्रिका व्रत के दौरान रात्रि जागरण और भक्ति भाव के साथ किया गया पूजन सफल होता है. जो महिलाएं प्रदोषकाल में पूरी श्रद्धा एवं भक्ति भाव से जीमूतवाहन की पूजा करती हैं, उनके संतान स्वस्थ, दीर्घायु तथा सभी सुखों से परिपूर्ण रहते हैं.

  • वैसे तो इस व्रत को स्त्रियाँ करती हैं, लेकिन स्त्री के अस्वस्थ होने की स्थिति में यह व्रत उनके पति द्वारा किये जाने का भी विधान है.
  • प्रदोषकाल में व्रती जीमूतवाहन की कुश से निर्मित प्रतिमा को धुप-दीप, नैवैध, अक्षत, पुष्प आदि अर्पित करके उसकी पूजा-अर्चना करती हैं.
  • इसके साथ मिट्टी तथा गाय के गोबर से चील व सियारिन की प्रतिमा बनायीं जाती है. प्रतिमा के माथे पर लाल सिंदूर का टिका लगाया जाता है.
  • पूजा के समय व्रत कथा का श्रवण होता है.
  • संतान की दीर्घायु, आरोग्य तथा कल्याण की कामना से अनुष्ठान पूर्ण होती है.

Betiyo ke liye JivitPutrika Vrat in Hindi

महिलाएं पुत्रवती होने के प्रतिक स्वरूप गले में धागे से बनी ‘जिउतिया’ पहनती हैं. पुत्रों की संख्या से एक अधिक गाँठ लगाये जाने की परंपरा है.

अब माताएं बेटियों के नाम से भी गाँठ बांधने लगी हैं, जो लैंगिक समानता का सूचक है. अतिरिक्त गाँठ जीमूतवाहन के नाम से लगायी जाती, जो संतान संतान-सुख के दाता माने जाते हैं.स्वयं पहनने से पहले उस कुछ देर संतान को पहना कर रखा जाता है.



Jitiya Vrat Puja Vidhi

पितृपक्ष मरण ही अष्टमी को जीवित्पुत्रिका (जिउतिया/जितिया) का प्रावधान है. इसमें माताएं एक दिन का निर्जला उपवास रखती हैं.

अष्टमी के दिन सूर्यास्त से पहले ही उठ कर महिलाएं बिना नमक व प्याज-लहसुन आदि के झींगा, सतपुतिया, तोरई की सब्जी और आटे के टिकरे बनाती हैं. फिर चुडा और दही के साथ इन्हें दिवंगत सास और चूल्हों सियारों को चढ़ाया जाता है.

सभी संतानों के साथ उस आहार को प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाता है. इसे ‘सरगही’ कहते हैं. उसके बाद पानी पीने के साथ निर्जला व्रत का प्रारंभ होता है.

अगले दिन शाम में विधि-विधानपूर्वक पूजा की जाती है. नवमी के दिन सूर्योदय के पश्चात् व्रत का समापन अनुमन्य है. स्वास्थ्य या अन्य किसी कारण से अगर कोई स्त्री पानी पीना चाहे, तो भी वह आगे व्रत को जरी रख सकती हैं, लेकिन जो स्त्रियाँ इच्छा से निर्जला ही व्रत को आगे बढाती हैं, उस ‘खर करना’ कहते हैं.

अगले दिन यानि की नवमी के दिन नारायण की पूजा की जाती है. भगवान् सूर्य की मूर्ति को भी स्नान करवा कर बाजरा और चने से बने प्रसाद का भोग लगाया जाता है. प्रसाद में भी खड़े फल ही दिए जाते हैं.

Conclusion: Jitiya Vrat Katha in Hindi

तो फ्रेंड्स! बस यही है JivitPutrika/ Jitiya Vrat Katha aur Pooja Vidhi. मुझे आशा है कि आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा होगा और अब आपको यह भी अच्छे-से पता चल गया होगा कि Jitiya Parv Kyo Manaya Jata Hai?

JivitPutrika Vrat से सम्बंधित अगर आपके मन में किसी भी तरह का कोई सवाल हो, तो निचे Comment कर जरुर बताएं. अगर आप इसी तरह के और Festival Blogs in Hindi पढना चाहते हैं, तो आप हमें follow कर सकते हैं.

अभी के लिए इतना ही, जल्द ही मिलेंगे किसी नए topic के साथ. Keep Reading… Keep Growing…


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