Dussehra/Durga Puja Essay in Hindi: दुर्गा पूजा पर निबंध (दशहरा 2019)

0
40
Durga Puja Essay in Hindi

भारत के अलग-अलग राज्यों में दुर्गा पूजा पर निबंध

Hi friends! क्या आपको पता है कि Durga Puja ki Shuruaat Kaise Hui? मैं आपको बता दूँ कि दुर्गा पूजा पर्व तो एक ही है, लेकिन इसके रूप अनेक हैं. मेरा प्रयास यही रहेगा कि इस Durga Puja Essay in Hindi लेख में मैं आपको ज्यादा-से-ज्यादा जानकारी दे सकूँ.

दुर्गा पूजा या शक्ति की आराधना. वह शक्ति, जो हर रूप में और हर किसी में व्याप्त है. इस शक्ति के विभिन्न रूप हैं और उन विभिन्न रूपों की साधना करने के भिन्न-भिन्न तरीके.

उत्तर भारत में जहाँ दुर्गा पूजा को आध्यात्मिक और सात्विक तरीके से मनाने का प्रचलन है, वहीं पूर्वी भारत (खास कर बंगाल) में इसे धूमधाम से मनाने का रिवाज है. इसी तरह मध्य भारत में इसे प्रकृति की पूजा के तौर पर मनाया जाता है.

तो आज मैं आपसे Dussehra Festival Information about Durga Puja in Hindi के बारे में बताने जा रहा हूँ कि देश के विभिन्न हिस्से के दुर्गा पूजा महोत्सव की क्या खासियत है? अगर आप भी Durga Puja Essay in Hindi/निबंध या जानकारी जानना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल अंत तक जरुर पढ़ें.

Kolkata Durgotsav/Durga Puja in Bengali (West Bengal)

फ्रेंड्स, अगर आपको पता न हो तो मैं आपको बता दूँ कि दुर्गा पूजा की शुरुआत सांस्कृतिक भूमि मानी जानेवाली बंग भूमि अर्थात बंगाल से हुई. Oldest Durga Puja in Kolkata (Bengal) काफी धूमधाम से मनाया जाता है.

यहाँ की दुर्गा पूजा भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. वहां इसे शारदोत्सब, महा पूजो, शारदियो पूजो व अकालबोधन के नाम से जाना जाता है.

यहाँ महाल्या के दिन देवी की अनगढ़ प्रतिमा के नेत्र दान करने के साथ ही दुर्गा पूजा की शुरुआत मानी जाती है. यह प्रक्रिया चक्षु दान कहलाती है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवी अपने दोनों पुत्रों- गणेश और कार्तिकेय को लेकर दस दिनों के लिए अपने मायके (बंगाल) आती हैं, इसी वजह से बंगाल में दुर्गा पूजा बेटी (उमा) के मायके वापस आने के जश्न के रूप में मनाया जाता है.

इस दौरान लोग बेहतरीन किस्म का खाना खाते हैं, नए कपडे पहनते हैं और अपनी बेटी, जिसे वो माँ भी मानते हैं के आने का जश्न मनाते हैं.

Durga Puja Essay in Hindi

Durga Puja Preparation in Hindi (Dussehra)

हालाँकि Bengal me Durga Puja ki Taiyari काफी पहले से शुरू हो जाती है, लेकिन अंतिम चार दिन विशेष पूजा होती है.

पंचमी से दुर्गोत्सव की शुरुआत होती है. महाषष्ठी की संध्या में कालीबोध के साथ ही देवी के श्रीमुख से आवरण हटाने के साथ ही देवी का प्राकट्स माना जाता है.

महाअष्टमी में होम और संधिपूजा होती है. कलश स्थापना, चंडी पाठ, भोग लगाना (different dishes) तथा सिन्दूर खेला बंगाली पूजा की खासियत होती है.

Tamil Nadu Durga Puja Essay in Hindi

तमिलनाडु में नवरात्री को ‘गोलू पर्व’ के नाम से जानते हैं. यहाँ लोग पर्व के अंतिम तीन दिन के तीनों रूपों- महादुर्गा, महाकाली और महासरस्वती की आराधना करते हैं.

इस दौरान घर की लड़कियां व महिलाएं अपने घरों में लकड़ी से बने रैक या स्टैंड पर एक साथ देवी के विभिन्न रूपों की प्रतिमाएं रखती हैं. ये प्रतिमाएं हर परिवार में एक से दूसरी पीढ़ी के बिच हस्तांतरित होती रहती है.

इसी तरह से पंडालों में भी करीब 100-150 छोटी-बड़ी मूर्तियाँ रखी जाती हैं. यह नजारा देखने में म्यूजियम जैसा दीखता है. मूर्ति इस दौरान लोग अपने सगे-सम्बन्धियों, मित्रों आदि को अपने घर आमंत्रित करते हैं और उन्हें स्नेहस्वरूप पान, सुपारी, नारियल और उपहार आदि देते हैं.

तमिलनाडु में ही कुलसेकारापट्टीनम दसारा उत्सव एक अलग और रोचक तरीका है दशहरा मनाने का. यह उत्सव मुत्थुरमण मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में मनाया जाता है, जो कि अपने नृत्य, संगीत, नाटक और विभिन्न तरह के वेशभूषा सज्जा की वजह से प्रसिद्ध है.

यहाँ के लोक संगीत थारा थपट्टम पर विचित्र वेशभूषा पहन कर लोगों द्वारा किया जानेवाला डांस आकर्षण का प्रमुख केंद्र होता है.

Dussehra/Durga Puja in Raipur, Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आयोजित बस्तर दशहरा विश्व की सबसे लम्बी अवधि तक चलने वाला पर्व है. यहाँ पूरे 75 दिनों तक दशहरा मनाया जाता है. यह प्रथा छः सौ साल से चली आ रही है.

इस दौरान यहाँ के लोग दंतेश्वरी देवी की पूजा करते हैं, जिन्हें ‘प्रकृति की देवी’ माना जाता है. बस्तर के जगदलपुर क्षेत्र में दंतेश्वरी देवी का मंदिर स्थित है. बस्तर दशहरा में संस्कृति, राजशाही सभ्यता और आदिवासियों के आपसी सद्भावना की झलक देखने को मिलती है.

इस पर्व की शुरुआत हरेली अमावस्या से होती है. इस दिन लोग अपनी कुलदेवी कांछिनदेवी की पूजा करते हैं. उस कांछिनगुड़ी (काँटों के झूले पर बैठाई गयी कुंवारी कन्या) से दशहरा मनाने की अनुमति ली जाती है.

Himachal Pradesh Durga Puja Essay in Hindi

जब देश के अन्य राज्यों में दशहरा समाप्त होता है, तो हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में इसकी शुरुआत होती है. यहाँ सात दिनों का दशहरा होता है. फिर भी यहाँ इसे ‘दशमी’ कहते हैं.

अश्विन महीने के प्रथम पक्ष में यहाँ के राजा देवी-देवताओं को न्योता देते हैं. देवताओं द्वारा निमंत्रण स्वीकारने रघुनाथजी, माता सीता व माँ हिडिम्बा की प्रतिमाओं को रंग-बिरंगी सजी हुई पालकियों में बिठा कर भव्य शोभा यात्रा निकली जाती है.

यह शोभा यात्रा छः दिनों तक चलती है. छठे दिन सभी देवी-देवताओं को कुल्लू के ढालपुर मैदान में लाया जाता है. सातवें दिन रघुनाथ जी के रथ को लंका दहन के लिए व्यास नदी के पास ले जाकर लंका दहन किया जाता है.

Conclusion: Durga Puja Essay in Hindi

तो फ्रेंड्स! बस यही है Dussehra/Durga Puja par Nibandh. मुझे आशा है कि आपको यह आर्टिकल Durga Puja in Hindi अच्छा लगा लगा होगा. और अब आपको यह भी अच्छे-से पता चल गया होगा कि India me Durga Puja ki Shuruaat Kaise Hui?

दुर्गा पूजा से सम्बंधित अगर आपके मन में किसी भी तरह का कोई सवाल हो, तो निचे Comment कर जरुर बताएं. अगर आप इसी तरह के और Indian Festival Blogs in Hindi पढना चाहते हैं, तो आप हमें follow कर सकते हैं.

अभी के लिए इतना ही, जल्द ही मिलेंगे किसी नए topic के साथ. Keep Reading… Keep Growing…


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here